श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.11.33 
ब्रूहि गच्छ दशग्रीवं पुरी राज्यं च यन्मम।
तत्राप्येतन्महाबाहो भुङ्क्ष्व राज्यमकण्टकम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'दूत! तुम जाकर दशग्रीव से कहो - महाबाहो! जो कुछ मेरा है, यह नगर और यह अखण्ड राज्य, वह सब तुम्हारा है। तुम इसका आनन्द लो॥ 33॥
 
‘Messenger! You go and tell Dashagriva – Mahabaho! Whatever I have, this city and this unobstructed kingdom, all of it is yours too. You enjoy it.॥ 33॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas