श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.11.32 
दत्ता ममेयं पित्रा तु लङ्का शून्या निशाचरै:।
निवेशिता च मे रक्षो दानमानादिभिर्गुणै:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'राक्षस! पहले यह भूमि राक्षसों से वीरान थी। उस समय मेरे पिता ने मुझे यहाँ रहने की आज्ञा दी और मैंने दान, आदर आदि गुणों से यहाँ के लोगों को बसाया।'
 
‘Demon! Earlier this land was deserted by demons. At that time my father ordered me to live here and I settled the people here by virtues like charity, respect, etc.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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