श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.11.31 
प्रहस्तादपि संश्रुत्य देवो वैश्रवणो वच:।
प्रत्युवाच प्रहस्तं तं वाक्यं वाक्यविदां वर:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
प्रहस्त की यह बात सुनकर वाणी का अर्थ समझने वालों में श्रेष्ठ भगवान वैश्रवण ने प्रहस्त को इस प्रकार उत्तर दिया -॥31॥
 
Hearing this from Prahastha, Lord Vaishravana, the best among those who understand the meaning of speech, replied to Prahastha in this way -॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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