Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.11.25: हे अतुलित पराक्रमी धनेश्वर! यदि आप यह लंकापुरी हमें लौटा दें, तो हमें बहुत प्रसन्नता होगी और यह माना जाएगा कि आपने धर्म का पालन किया है।'   |   ramayan सर्ग 7.11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.11.25 
तद् भवान् यदि नो ह्यद्य दद्यादतुलविक्रम।
कृता भवेन्मम प्रीतिधर्मश्चैवानुपालित:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे अतुलित पराक्रमी धनेश्वर! यदि आप यह लंकापुरी हमें लौटा दें, तो हमें बहुत प्रसन्नता होगी और यह माना जाएगा कि आपने धर्म का पालन किया है।'
 
O incomparably mighty Dhaneshwar! If you return this Lankapuri to us, we will be very happy and it will be considered that you have followed the Dharma.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)