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ramayan 7.11.22: उस समय रात्रिचर दशग्रीव त्रिकूट पर्वत पर ठहरे और उन्होंने वार्तालाप में कुशल प्रहस्त को अपना दूत बनाकर भेजा।   |   ramayan सर्ग 7.11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 11: रावण का संदेश सुनकर पिता की आज्ञा से कुबेर का लङ्का को छोड़कर कैलास पर जाना, लङ्का में रावण का राज्याभिषेक तथा राक्षसों का निवास  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.11.22 
त्रिकूटस्थ: स तु तदा दशग्रीवो निशाचर:।
प्रेषयामास दौत्येन प्रहस्तं वाक्यकोविदम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस समय रात्रिचर दशग्रीव त्रिकूट पर्वत पर ठहरे और उन्होंने वार्तालाप में कुशल प्रहस्त को अपना दूत बनाकर भेजा।
 
At that time the night-monger Dashagriva stayed on the Trikuta mountain and sent Prahasta, who was skilled in conversation, as his messenger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)