श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 109: परमधाम जाने के लिये निकले हुए श्रीराम के साथ समस्त अयोध्या वासियों का प्रस्थान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.109.3 
ततो वसिष्ठस्तेजस्वी सर्वं निरवशेषत:।
चकार विधिवद् धर्मं महाप्रास्थानिकं विधिम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर महर्षि वसिष्ठ ने महाप्रस्थान के समय के लिए उपयुक्त समस्त धार्मिक अनुष्ठान विधिपूर्वक सम्पन्न किए॥3॥
 
Upon his saying this, the illustrious sage Vasishtha performed all the religious rites appropriate for the time of Mahaprasthan in a proper manner. ॥ 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd