श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 109: परमधाम जाने के लिये निकले हुए श्रीराम के साथ समस्त अयोध्या वासियों का प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.109.2 
अग्निहोत्रं व्रजत्वग्रे दीप्यमानं सह द्विजै:।
वाजपेयातपत्रं च शोभमानं महापथे॥ २॥
 
 
अनुवाद
मेरे अग्निहोत्र की प्रज्वलित अग्नि ब्राह्मणों के आगे-आगे चले। मेरे वाजपेय यज्ञ का सुन्दर छत्र भी मेरी महान् यात्रा के पथ पर चले।॥2॥
 
The blazing fire of my Agnihotra should go ahead of the Brahmins. The beautiful umbrella of my Vajpayee Yajna should also go on the path of my great journey.'॥2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd