श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.108.29 
शासितश्च सखित्वेन कार्यं ते मम शासनम्।
प्रजा: संरक्ष धर्मेण नोत्तरं वक्तुमर्हसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
मैंने ये बातें आपसे मित्रतापूर्वक कही हैं। आपको मेरी आज्ञा का पालन करना चाहिए। आपको धर्मपूर्वक प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। इस समय मैंने जो कुछ कहा है, उसका आपको विरोध नहीं करना चाहिए॥ 29॥
 
I have told you these things in a friendly manner. You should follow my orders. You should protect the people with righteousness. At this time, you should not oppose whatever I have said.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)