श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीरामचन्द्रजी का भाइयों, सुग्रीव आदि वानरों तथा रीछों के साथ परमधाम जाने का निश्चय और विभीषण, हनुमान्, जाम्बवान्, मैन्द एवं द्विविद को इस भूतल पर ही रहने का आदेश देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.108.2 
ततस्त्रिभिरहोरात्रै: सम्प्राप्य मधुरामथ।
शत्रुघ्नाय यथातत्त्वमाचख्यु: सर्वमेव तत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तीन दिन और तीन रात चलकर वह मधुरा पहुँचा और शत्रुघ्न को अयोध्या में जो कुछ हुआ था, वह सब बताया॥ 2॥
 
After walking for three days and three nights he reached Madhura and told Shatrughna exactly what happened in Ayodhya.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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