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श्लोक 7.107.9  |
तच्छ्रुत्वा भरतेनोक्तं दृष्ट्वा चापि ह्यधोमुखान्।
पौरान् दु:खेन संतप्तान् वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| भरत की बातें सुनकर तथा गांव वालों को उदास और दुखी देखकर महर्षि वशिष्ठ बोले - |
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| Hearing Bharat's words and seeing the villagers looking down and filled with sorrow, Maharishi Vashishtha said - |
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