श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 107: वसिष्ठजी के कहने से श्रीराम का पुरवासियों को अपने साथ ले जाने का विचार तथा कुश और लव का राज्याभिषेक करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.107.9 
तच्छ्रुत्वा भरतेनोक्तं दृष्ट्वा चापि ह्यधोमुखान्।
पौरान् दु:खेन संतप्तान् वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भरत की बातें सुनकर तथा गांव वालों को उदास और दुखी देखकर महर्षि वशिष्ठ बोले -
 
Hearing Bharat's words and seeing the villagers looking down and filled with sorrow, Maharishi Vashishtha said -
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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