श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 107: वसिष्ठजी के कहने से श्रीराम का पुरवासियों को अपने साथ ले जाने का विचार तथा कुश और लव का राज्याभिषेक करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.107.6 
सत्येनाहं शपे राजन् स्वर्गभोगेन चैव हि।
न कामये यथा राज्यं त्वां विना रघुनन्दन॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! हे रघुनन्दन! मैं सत्य शपथपूर्वक कहता हूँ कि आपके बिना मुझे न तो राज्य चाहिए और न ही स्वर्ग के सुख चाहिए॥6॥
 
O King! O son of Raghunandan! I swear by the truth that without you I don't want the kingdom, nor even the pleasures of heaven.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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