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श्लोक 7.107.6  |
सत्येनाहं शपे राजन् स्वर्गभोगेन चैव हि।
न कामये यथा राज्यं त्वां विना रघुनन्दन॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! हे रघुनन्दन! मैं सत्य शपथपूर्वक कहता हूँ कि आपके बिना मुझे न तो राज्य चाहिए और न ही स्वर्ग के सुख चाहिए॥6॥ |
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| O King! O son of Raghunandan! I swear by the truth that without you I don't want the kingdom, nor even the pleasures of heaven.॥ 6॥ |
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