श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 107: वसिष्ठजी के कहने से श्रीराम का पुरवासियों को अपने साथ ले जाने का विचार तथा कुश और लव का राज्याभिषेक करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.107.4 
तच्छ्रुत्वा राघवेणोक्तं सर्वा: प्रकृतयो भृशम्।
मूर्धभि: प्रणता भूमौ गतसत्त्वा इवाभवन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के ये वचन सुनकर सारी प्रजा सिर झुकाकर भूमि पर गिर पड़ी और प्राणहीन हो गई॥4॥
 
On hearing these words of Sri Rama, all the subjects fell with their heads bowed to the ground and became lifeless. ॥4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd