श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 107: वसिष्ठजी के कहने से श्रीराम का पुरवासियों को अपने साथ ले जाने का विचार तथा कुश और लव का राज्याभिषेक करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.107.2 
अद्य राज्येऽभिषेक्ष्यामि भरतं धर्मवत्सलम्।
अयोध्याया: पतिं वीरं ततो यास्याम्यहं वनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
आज मैं अपने धर्मप्रेमी वीर भाई भरत को अयोध्या का राजा अभिषिक्त करूँगा। तत्पश्चात् वन को चला जाऊँगा॥ 2॥
 
Today I will anoint my brave brother Bharat, who loves Dharma, as the king of Ayodhya. After that I will go to the forest.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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