श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 107: वसिष्ठजी के कहने से श्रीराम का पुरवासियों को अपने साथ ले जाने का विचार तथा कुश और लव का राज्याभिषेक करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.107.11 
वसिष्ठस्य तु वाक्येन उत्थाप्य प्रकृतीजनम्।
किं करोमीति काकुत्स्थ: सर्वान् वचनमब्रवीत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठजी के कहने पर श्री रघुनाथजी ने लोगों को इकट्ठा किया और उनसे पूछा, 'मैं आपका कौन-सा कार्य संपन्न करूँ?'॥11॥
 
At the behest of Vasishtha, Sri Raghunatha gathered the people and asked them all, 'Which task of yours should I accomplish?'॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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