श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.105.9 
एकस्य मरणं मेऽस्तु मा भूत् सर्वविनाशनम्।
इति बुद्धॺा विनिश्चित्य राघवाय न्यवेदयत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अपनी बुद्धि से यह निश्चय करके कि 'मैं अकेला ही मर जाऊँ तो अच्छा है, परन्तु सब लोग नष्ट न हों', लक्ष्मण ने श्री रघुनाथ को दुर्वासा के आगमन की सूचना दी।
 
Having decided with his intellect that 'it is better if I die alone, but not everyone should be destroyed', Lakshmana informed Sri Raghunatha about the arrival of Durvasa.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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