vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना
»
श्लोक 8
श्लोक
7.105.8
तच्छ्रुत्वा घोरसंकाशं वाक्यं तस्य महात्मन:।
चिन्तयामास मनसा तस्य वाक्यस्य निश्चयम्॥ ८॥
अनुवाद
उस महात्मा के ये गंभीर वचन सुनकर लक्ष्मण ने मन ही मन उनके वचनों से प्रकट हुए दृढ़ निश्चय पर विचार किया।
Having heard these grave words of that great soul, Lakshmana reflected in his mind upon the determination which was evident from his words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×