श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.105.8 
तच्छ्रुत्वा घोरसंकाशं वाक्यं तस्य महात्मन:।
चिन्तयामास मनसा तस्य वाक्यस्य निश्चयम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस महात्मा के ये गंभीर वचन सुनकर लक्ष्मण ने मन ही मन उनके वचनों से प्रकट हुए दृढ़ निश्चय पर विचार किया।
 
Having heard these grave words of that great soul, Lakshmana reflected in his mind upon the determination which was evident from his words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)