अस्मिन् क्षणे मां सौमित्रे रामाय प्रतिवेदय।
अस्मिन् क्षणे गां सौमित्रे न निवेदयसे यदि।
विषयं त्वां पुरं चैव शपिष्ये राघवं तथा॥ ६॥
भरतं चैव सौमित्रे युष्माकं या च संतति:।
न हि शक्ष्याम्यहं भूयो मन्युं धारयितुं हृदि॥ ७॥
अनुवाद
‘सुमित्रकुमार! अभी इसी क्षण श्री राम को मेरे आगमन की सूचना दो। यदि तुम अभी उन्हें मेरे आगमन की सूचना नहीं दोगे, तो मैं इस राज्य को, इस नगर को, तुम्हें, श्री राम को, भरत को तथा तुम्हारी संतान को शाप दे दूँगा। मैं इस क्रोध को अपने हृदय में पुनः सहन नहीं कर सकूँगा।’॥6-7॥
‘Sumitrakumar! Inform Shri Ram of my arrival this very moment. If you do not inform him of my arrival right now, then I will curse this kingdom, this city, you, Shri Ram, Bharat and your progeny. I will not be able to bear this anger in my heart again.’॥ 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥