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श्लोक 7.105.4  |
किं कार्यं ब्रूहि भगवन् को ह्यर्थ: किं करोम्यहम्।
व्यग्रो हि राघवो ब्रह्मन् मुहूर्तं परिपाल्यताम्॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रभु! कहिए, आपका क्या कार्य है? क्या प्रयोजन है? और मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ? हे ब्रह्म! इस समय श्री रघुनाथजी किसी अन्य कार्य में लगे हुए हैं; अतः आप दो घड़ी तक उनकी प्रतीक्षा करें॥4॥ |
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| Lord! Tell me, what is your work? What is the purpose? And what service can I render to you? Brahman! At this time Shri Raghunathji is engaged in some other work; hence please wait for him for two hours.'॥ 4॥ |
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