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श्लोक 7.105.12  |
तद् वाक्यं राघवेणोक्तं श्रुत्वा मुनिवर: प्रभु:।
प्रत्याह रामं दुर्वासा: श्रूयतां धर्मवत्सल॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| श्री रघुनाथजी के वचन सुनकर प्रभावशाली ऋषि दुर्वासा ने उनसे कहा - 'धर्मवत्सल! सुनो॥12॥ |
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| On hearing the words of Shri Raghunathji, the influential sage Durvasa said to him - 'Dharmavatsal! Listen.॥ 12॥ |
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