श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 105: दुर्वासा के शाप के भय से लक्ष्मण का नियम भङ्ग करके श्रीराम के पास इनके आगमन का समाचार देने के लिये जाना, श्रीराम का दुर्वासा मुनि को भोजन कराना और उनके चले जाने पर लक्ष्मण के लिये चिन्तित होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.105.12 
तद् वाक्यं राघवेणोक्तं श्रुत्वा मुनिवर: प्रभु:।
प्रत्याह रामं दुर्वासा: श्रूयतां धर्मवत्सल॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के वचन सुनकर प्रभावशाली ऋषि दुर्वासा ने उनसे कहा - 'धर्मवत्सल! सुनो॥12॥
 
On hearing the words of Shri Raghunathji, the influential sage Durvasa said to him - 'Dharmavatsal! Listen.॥ 12॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd