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ramayan 7.104.11: जगदीश्वर! जब रावण के द्वारा प्रजा का विनाश हो रहा था, तब आपने उस राक्षस का वध करने की इच्छा से मनुष्य रूप में अवतार लेने का निश्चय किया॥11॥   |   ramayan सर्ग 7.104: कालका श्रीरामचन्द्रजी को ब्रह्माजी का संदेश सुनाना और श्रीराम का उसे स्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.104.11 
स त्वं वित्रास्यमानासु प्रजासु जगतां वर।
रावणस्य वधाकाङ्क्षी मानुषेषु मनोऽदधा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जगदीश्वर! जब रावण के द्वारा प्रजा का विनाश हो रहा था, तब आपने उस राक्षस का वध करने की इच्छा से मनुष्य रूप में अवतार लेने का निश्चय किया॥11॥
 
Jagadishwar! When the people were being destroyed by Ravana, you decided to take incarnation in human form with the desire to kill that demon.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)