श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 104: कालका श्रीरामचन्द्रजी को ब्रह्माजी का संदेश सुनाना और श्रीराम का उसे स्वीकार करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.104.10 
अदित्यां वीर्यवान् पुत्रो भ्रातॄणां वीर्यवर्धन:।
समुत्पन्नेषु कृत्येषु तेषां साह्याय कल्पसे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'तब आपने स्वयं अदिति के गर्भ से परम बलशाली वामन रूप में जन्म लिया। तब से आप अपने भाई इन्द्र आदि देवताओं की शक्ति बढ़ाते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।॥10॥
 
‘Then you yourself took birth from the womb of Aditi in the form of the most powerful Vaman. Since then you increase the power of your brother Indra and other gods and are always ready to protect them whenever required.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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