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ramayan 7.101.9-10: देवताओं को भी स्मरण नहीं था कि उन्होंने ऐसा भयंकर युद्ध देखा था। सभी वीर और महामनस्वी गंधर्वों के पलक झपकते ही मारे जाने के बाद, कैकेयी के पुत्र भरत ने वहाँ दो समृद्ध और सुंदर नगर बसाए।   |   ramayan सर्ग 7.101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  7.101.9-10 
तद् युद्धं तादृशं घोरं न स्मरन्ति दिवौकस:।
निमेषान्तरमात्रेण तादृशानां महात्मनाम्॥ ९॥
हतेषु तेषु सर्वेषु भरत: केकयीसुत:।
निवेशयामास तदा समृद्धे द्वे पुरोत्तमे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को भी स्मरण नहीं था कि उन्होंने ऐसा भयंकर युद्ध देखा था। सभी वीर और महामनस्वी गंधर्वों के पलक झपकते ही मारे जाने के बाद, कैकेयी के पुत्र भरत ने वहाँ दो समृद्ध और सुंदर नगर बसाए।
 
Even the gods could not remember having seen such a fierce battle. After all the valiant and great-minded Gandharvas were killed in the blink of an eye, Kaikeyi's son Bharat established two prosperous and beautiful cities there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)