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ramayan 7.101.5: फिर दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच भयंकर और रोंगटे खड़े कर देने वाला युद्ध छिड़ गया। यह भयानक युद्ध सात रातों तक चलता रहा, लेकिन किसी भी पक्ष को विजय नहीं मिली।   |   ramayan सर्ग 7.101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.101.5 
तत: समभवद्युद्धं तुमुलं लोमहर्षणम्।
सप्तरात्रं महाभीमं न चान्यतरयोर्जय:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
फिर दोनों पक्षों की सेनाओं के बीच भयंकर और रोंगटे खड़े कर देने वाला युद्ध छिड़ गया। यह भयानक युद्ध सात रातों तक चलता रहा, लेकिन किसी भी पक्ष को विजय नहीं मिली।
 
Then a fierce and hair-raising battle broke out between the armies of both sides. That dreadful battle continued for seven nights, but neither side was victorious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)