श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.101.4 
श्रुत्वा तु भरतं प्राप्तं गन्धर्वास्ते समागता:।
योद्धुकामा महावीर्या व्यनदंस्ते समन्तत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भरत का आगमन सुनकर वे पराक्रमी गन्धर्व युद्ध की इच्छा से एकत्र होकर सब ओर जोर-जोर से गर्जना करने लगे॥4॥
 
Hearing the arrival of Bharat, those mighty Gandharvas gathered with the desire of war and started roaring loudly everywhere. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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