Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.101.17: वहाँ पहुँचकर श्रीमान भरत ने द्वितीय धर्मराज के समान महात्मा श्री रघुनाथजी को उसी प्रकार प्रणाम किया, जैसे इन्द्र ब्रह्माजी को प्रणाम करते हैं॥17॥ | ramayan सर्ग 7.101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ पहुँचकर श्रीमान भरत ने द्वितीय धर्मराज के समान महात्मा श्री रघुनाथजी को उसी प्रकार प्रणाम किया, जैसे इन्द्र ब्रह्माजी को प्रणाम करते हैं॥17॥
Reaching there, Shriman Bharat bowed down to the great soul Shri Raghunathji, who is like the second Dharmaraja, in the same manner as Indra bows down to Brahmaji.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥