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ramayan 7.101.13: दोनों नगरों की सुन्दरता अत्यंत मनमोहक थी। दोनों स्थानों का व्यापार ईमानदार, शुद्ध और सरल था। दोनों नगर बाग-बगीचों और नाना प्रकार के वाहनों से भरे हुए थे। उनके भीतर अनेक प्रकार के बाज़ार थे।   |   ramayan सर्ग 7.101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 101: भरत का गन्धर्वों पर आक्रमण और उनका संहार करके वहाँ दो सुन्दर नगर बसाकर अपने दोनों पुत्रों को सौंपना और फिर अयोध्या को लौट आना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.101.13 
उभे सुरुचिरप्रख्ये व्यवहारैरकिल्बिषै:।
उद्यानयानसम्पूर्णे सुविभक्तान्तरापणे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दोनों नगरों की सुन्दरता अत्यंत मनमोहक थी। दोनों स्थानों का व्यापार ईमानदार, शुद्ध और सरल था। दोनों नगर बाग-बगीचों और नाना प्रकार के वाहनों से भरे हुए थे। उनके भीतर अनेक प्रकार के बाज़ार थे।
 
The beauty of both the cities was extremely charming. The business of both the places was honest, pure and simple. Both the cities were full of gardens and various types of vehicles. There were many different markets inside them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)