vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 100: केकयदेश से ब्रह्मर्षि गार्ग्य का भेंट लेकर आना और उनके संदेश के अनुसार श्रीराम की आज्ञा से कुमारों सहित भरत का गन्धर्व देश पर आक्रमण करने के लिये प्रस्थान
»
श्लोक 20
श्लोक
7.100.20
नक्षत्रेण च सौम्येन पुरस्कृत्याङ्गिर:सुतम्।
भरत: सह सैन्येन कुमाराभ्यां विनिर्ययौ॥ २०॥
अनुवाद
तत्पश्चात् सौम्य नक्षत्र (मृगशिरा) में अंगिरा के पुत्र महर्षि गार्ग्य ने सेना और कुमारों के साथ भारतवर्ष की यात्रा की॥20॥
After that, in Soumya Nakshatra (Mrigashira), Maharishi Gargya, son of Angira, traveled to Bharat along with the army and the Kumaras. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×