श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.10.41-42h 
प्राञ्जलि: सा तु पार्श्वस्था प्राह वाक्यं सरस्वती॥ ४१॥
इयमस्म्यागता देव किं कार्यं करवाण्यहम्।
 
 
अनुवाद
सरस्वती ने उनके पास खड़ी होकर हाथ जोड़कर कहा, 'हे प्रभु! मैं आ गई हूँ। मेरे लिए क्या आदेश है? मुझे क्या कार्य करना चाहिए?'॥41 1/2॥
 
Standing beside him, Saraswati folded her hands and said, 'O Lord! I have come. What are your orders for me? What work should I do?'॥ 41 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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