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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  7.10.40-41h 
एवमुक्त: सुरैर्ब्रह्माचिन्तयत् पद्मसम्भव:॥ ४०॥
चिन्तिता चोपतस्थेऽस्य पार्श्वं देवी सरस्वती।
 
 
अनुवाद
देवताओं के ऐसा कहने पर कमल से उत्पन्न ब्रह्मा ने सरस्वती का स्मरण किया। ऐसा सोचते ही देवी सरस्वती उनके पास आ गईं।
 
‘When the gods said this, Brahma, born from the lotus, remembered Saraswati. As soon as he thought of this, Goddess Saraswati came near him. 40 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)