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ramayan 7.10.38-39h: चूँकि इस राक्षस ने पहला वर न पाकर भी जीवों को खाने का ऐसा क्रूर कार्य किया है, अतः यदि इसे वर मिल गया, तो उस स्थिति में यह तीनों लोकों को खा जाएगा ॥38 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.10.38-39h 
अलब्धवरपूर्वेण यत् कृतं राक्षसेन तु॥ ३८॥
यद्येष वरलब्ध: स्याद् भक्षयेद् भुवनत्रयम्।
 
 
अनुवाद
चूँकि इस राक्षस ने पहला वर न पाकर भी जीवों को खाने का ऐसा क्रूर कार्य किया है, अतः यदि इसे वर मिल गया, तो उस स्थिति में यह तीनों लोकों को खा जाएगा ॥38 1/2॥
 
Since this demon has done such a cruel act of devouring living beings despite not getting the first boon, then if he gets the boon, then in that case he will eat all the three worlds. 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)