श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.10.33 
नहि धर्माभिरक्तानां लोके किंचन दुर्लभम्।
पुन: प्रजापति: प्रीतो विभीषणमुवाच ह॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर प्रजापति ब्रह्मा पुनः प्रसन्न हो गए और विभीषण से बोले - 'क्योंकि धर्म में तत्पर रहने वालों के लिए कोई भी कार्य कठिन नहीं है।'
 
On hearing this the Prajapati Brahma became pleased again and said to Vibhishan - 'Because nothing is difficult for those who are devoted to Dharma.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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