Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.10.25-26h: पितामह ब्रह्माजी के ऐसा कहते ही दशग्रीव राक्षस के सिर, जो पहले अग्नि में जल गए थे, फिर नए रूप में प्रकट हो गए ॥25 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.10.25-26h 
एवं पितामहोक्तस्य दशग्रीवस्य रक्षस:॥ २५॥
अग्नौ हुतानि शीर्षाणि पुनस्तान्युत्थितानि वै।
 
 
अनुवाद
पितामह ब्रह्माजी के ऐसा कहते ही दशग्रीव राक्षस के सिर, जो पहले अग्नि में जल गए थे, फिर नए रूप में प्रकट हो गए ॥25 1/2॥
 
As soon as Grandfather Brahma said this, the heads of demon Dashagriva, which were first burnt in the fire, then appeared in a new form. 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)