श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 10: रावण आदि की तपस्या और वर-प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.10.18 
एवमुक्ते तदा राम ब्रह्मणा लोककर्तृणा।
दशग्रीव उवाचेदं कृताञ्जलिरथाग्रत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
श्रीराम! जब जगत् के रचयिता ब्रह्माजी ने ऐसा कहा, तब दशग्रीव ने उनके सामने हाथ जोड़कर कहा-॥18॥
 
Sriram! When the creator of the world Brahmaji said this, Dashagriva folded his hands in front of him and said – ॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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