श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 97: सुग्रीव के साथ महोदर का घोर युद्ध तथा वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.97.13 
तामापतन्तीं सहसा शिलां दृष्ट्वा महोदर:।
असम्भ्रान्तस्ततो बाणैर्निर्बिभेद दुरासदाम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महोदर ने जब उस अजेय शिला को अचानक अपनी ओर आते देखा, तो भी वे घबराये नहीं, बल्कि अपने बाणों से उसे टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Even when Mahodar saw that invincible rock suddenly coming towards him, he did not panic. He broke it into pieces with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)