श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 96: सुग्रीव द्वारा राक्षस सेना का संहार और विरूपाक्ष का वध  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.96.36 
विनाशितं प्रेक्ष्य विरूपनेत्रं
महाबलं तं हरिपार्थिवेन।
बलं समेतं कपिराक्षसाना-
मुद‍्वृत्तगङ्गाप्रतिमं बभूव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वानरराज सुग्रीव द्वारा महाबली विरुपाक्ष को मारा गया देखकर वानरों और राक्षसों की सेनाएँ एकत्रित होकर उमड़ती हुई गंगा के समान व्याकुल हो उठीं (एक ओर हर्ष का कोलाहल था तो दूसरी ओर शोक से वेदना का हाहाकार)।
 
Seeing the mighty Virupaksha being killed by the monkey king Sugreeva, the armies of the monkeys and demons gathered together and became agitated like the surging Ganga (on one side there was the uproar of joy and on the other side there were cries of pain due to grief).
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे षण्णवतितम: सर्ग: ॥ ९ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें छानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ९ ६॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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