श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 96: सुग्रीव द्वारा राक्षस सेना का संहार और विरूपाक्ष का वध  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.96.26-27h 
मुष्टिप्रहाराभिहतो विरूपाक्षो निशाचर:।
तेन खड्गेन संक्रुद्ध: सुग्रीवस्य चमूमुखे॥ २६॥
कवचं पातयामास पद्‍भ्यामभिहतोऽपतत्।
 
 
अनुवाद
उसके मुक्के से घायल होकर रात्रिचर राक्षस विरुपाक्ष और भी अधिक क्रोधित हो गया और सेना के आगे आकर उसने उसी तलवार से सुग्रीव का कवच काट डाला; तथा उसके पैरों से घायल होकर वह भी भूमि पर गिर पड़ा॥26॥
 
Being struck by his punch, the nocturnal demon Virupaksha became more furious and at the front of the army he cut off Sugreeva's armour with the same sword; and being also struck by his feet he fell to the ground.॥26॥
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