श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 96: सुग्रीव द्वारा राक्षस सेना का संहार और विरूपाक्ष का वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.96.2 
रावणस्याप्रसह्यं तं शरसम्पातमेकत:।
न शेकु: सहितुं दीप्तं पतङ्गा ज्वलनं यथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे वानर रावण के बाणों के असह्य प्रहार को क्षण भर भी सहन नहीं कर सके; जैसे पतंगा प्रज्वलित अग्नि का स्पर्श क्षण भर भी सहन नहीं कर सकता॥ 2॥
 
Those monkeys could not endure the unbearable attack of Ravana's arrows for even a moment; just like a kite cannot endure the touch of a burning fire for even a moment.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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