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ramayan 6.94.25: हमारे प्रमुख योद्धा श्री राम के द्वारा मारे गए। अब हम अपने जीवन की आशा छोड़ चुके हैं। हमें इस भय का अंत नहीं दिखाई देता, इसलिए हम अनाथों की तरह विलाप कर रहे हैं॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 6.94: राक्षसियों का विलाप   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.94.25 
हतप्रवीरा रामेण निराशा जीविते वयम्।
अपश्यन्त्यो भयस्यान्तमनाथा विलपामहे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हमारे प्रमुख योद्धा श्री राम के द्वारा मारे गए। अब हम अपने जीवन की आशा छोड़ चुके हैं। हमें इस भय का अंत नहीं दिखाई देता, इसलिए हम अनाथों की तरह विलाप कर रहे हैं॥ 25॥
 
‘Our chief warriors were killed by Shri Ram. Now we have lost hope in our lives. We do not see an end to this fear, therefore we are lamenting like orphans.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)