Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.94.14-15: श्री रामजी ने जनस्थान में भयंकर कर्म करने वाले चौदह हजार राक्षसों को अग्नि की ज्वाला के समान तेजस्वी बाणों द्वारा काल के गाल में डाल दिया था और समरांगण में सूर्य के समान तेजस्वी सायकों द्वारा खर, दूषण और त्रिशिरक का भी वध कर दिया था; उनकी अजेयता को समझने के लिए यही पर्याप्त उदाहरण था ॥14-15॥ | ramayan सर्ग 6.94: राक्षसियों का विलाप । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री रामजी ने जनस्थान में भयंकर कर्म करने वाले चौदह हजार राक्षसों को अग्नि की ज्वाला के समान तेजस्वी बाणों द्वारा काल के गाल में डाल दिया था और समरांगण में सूर्य के समान तेजस्वी सायकों द्वारा खर, दूषण और त्रिशिरक का भी वध कर दिया था; उनकी अजेयता को समझने के लिए यही पर्याप्त उदाहरण था ॥14-15॥
Shri Ram had shot the fourteen thousand demons who were doing terrible deeds in the Janasthan, into the cheeks of Kaal with his arrows as bright as the flame of fire and had also killed Khar, Dushan and Trishiraka in the Samarangana with the sayaks who were luminous like the sun; This was enough example to understand his invincibility. 14-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥