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श्लोक 35
श्लोक
6.93.35
हतैर्गजपदात्यश्वैस्तद् बभूव रणाजिरम्।
आक्रीडभूमि: क्रुद्धस्य रुद्रस्येव महात्मन:॥ ३५॥
अनुवाद
मृत हाथियों, घोड़ों और पैदल सैनिकों की लाशों से भरा हुआ वह युद्धक्षेत्र क्रोधित महात्मा रुद्रदेव की क्रीड़ास्थली के समान प्रतीत हो रहा था।
Filled with the corpses of dead elephants, horses and infantry, that battle-field looked like the playground of the enraged Mahatma Rudradeva. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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