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श्लोक 6.92.65  |
मैथिलीं रूपसम्पन्नां प्रत्यवेक्षस्व पार्थिव।
तस्मिन्नेव सहास्माभिराहवे क्रोधमुत्सृज॥ ६५॥ |
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| अनुवाद |
| हे पृथ्वी के स्वामी! मिथिला की इस पुत्री के दिव्य रूप को देखिए (इस पर दया कीजिए) और हमारे साथ युद्धभूमि में आइए तथा भगवान राम पर अपना क्रोध उतारिए। |
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| Lord of the Earth! Look at the divine form of this daughter of Mithila (have mercy on her) and come with us to the battle field and vent your anger on Lord Rama. |
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