श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.92.63 
कथं नाम दशग्रीव साक्षाद्वैश्रवणानुज।
हन्तुमिच्छसि वैदेहीं क्रोधाद् धर्ममपास्य च॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महाराज दशग्रीव! आप तो स्वयं कुबेर के भाई हैं; फिर आप क्रोधवश धर्म को त्यागकर विदेहकुमारी को मारने की इच्छा क्यों कर रहे हैं?॥ 63॥
 
‘Maharaja Dashagriva! You are the brother of Kubera himself; then how come you, out of anger, have given up on Dharma and are wishing to kill Videha Kumari?॥ 63॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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