श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.92.29 
तस्यैव तपसो व्युष्टॺा प्रसादाच्च स्वयंभुव:।
नासुरेभ्यो न देवेभ्यो भयं मम कदाचन॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘उस तपस्या के फल से तथा ब्रह्माजी की कृपा से मुझे न तो देवताओं से भय लगता है और न ही दानवों से।
 
‘By the result of that penance and by the grace of Brahmaji, I am never afraid of either the gods or the demons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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