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श्लोक 6.92.29  |
तस्यैव तपसो व्युष्टॺा प्रसादाच्च स्वयंभुव:।
नासुरेभ्यो न देवेभ्यो भयं मम कदाचन॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘उस तपस्या के फल से तथा ब्रह्माजी की कृपा से मुझे न तो देवताओं से भय लगता है और न ही दानवों से। |
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| ‘By the result of that penance and by the grace of Brahmaji, I am never afraid of either the gods or the demons. |
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