श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 92: रावण का शोक तथा सुपार्श्व के समझाने से उसका सीता-वध से निवृत्त होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.92.12 
अद्य नैर्ऋतकन्यानां श्रोष्याम्यन्त:पुरे रवम्।
करेणुसङ्घस्य यथा निनादं गिरिगह्वरे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जैसे राज हाथी के मारे जाने पर पर्वत की गुफाओं में हथिनियों का आर्तनाद सुनाई देता है, वैसे ही आज मुझे अंतःपुरों में राक्षस कन्याओं का करुण आर्तनाद सुनना पड़ेगा॥12॥
 
‘Just as the wailing cries of female elephants are heard in the caves of a mountain when a king elephant is killed, similarly today I will have to listen to the pitiful cries of the demon daughters in the inner chambers.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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