श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 90: इन्द्रजित और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध तथा इन्द्रजित का वध  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  6.90.89 
ततोऽभ्यनन्दन् संहृष्टा: समरे हरियूथपा:।
तमप्रतिबलं दृष्ट्वा हतं नैर्ऋतपुङ्गवम्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में अतुलित पराक्रमी रात्रिचर इन्द्रजित् को मारा गया देखकर वानरों ने हर्ष में भरकर भगवान् लक्ष्मण को बधाई देना आरम्भ किया ॥89॥
 
Seeing Indrajit, the incomparably powerful nocturnal warrior, killed in the battle, the monkeys, filled with joy, started congratulating Lord Lakshmana. 89॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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