श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 90: इन्द्रजित और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध तथा इन्द्रजित का वध  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  6.90.85 
आकाशे चापि देवानां शुश्रुवे दुन्दुभिस्वन:।
नृत्यद्भिरप्सरोभिश्च गन्धर्वैश्च महात्मभि:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
आकाश में नाचती हुई अप्सराओं और गाते हुए गंधर्वों के नृत्य और गान की ध्वनि के साथ-साथ देवताओं के नगाड़ों की ध्वनि भी सुनाई देने लगी।
 
Along with the sound of the dance and songs of the dancing Apsaras in the sky and the singing Gandharvas, the sound of the drums of the gods also became audible. 85.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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