श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 90: इन्द्रजित और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध तथा इन्द्रजित का वध  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  6.90.82 
शान्तरश्मिरिवादित्यो निर्वाण इव पावक:।
बभूव स महाबाहुर्व्यपास्तगतजीवित:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु इन्द्रजित जब प्राणहीन हो गया, तब वह शान्त किरणों वाले सूर्य अथवा बुझी हुई अग्नि के समान मंद हो गया ॥82॥
 
When the great-armed Indrajit became lifeless, he became as dull as the sun with calm rays or an extinguished fire. 82॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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