श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 90: इन्द्रजित और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध तथा इन्द्रजित का वध  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  6.90.58-59h 
आददे निशितं बाणमासुरं शत्रुदारणम्।
तस्माच्चापाद् विनिष्पेतुर्भास्वरा: कूटमुद‍्गरा:॥ ५८॥
शूलानि च भुशुण्डॺश्च गदा: खड्गा: परश्वधा:।
 
 
अनुवाद
उन्होंने असुर नामक तीक्ष्ण शत्रु-संहारक बाण का प्रयोग किया। तत्पश्चात उनके धनुष से चमकते हुए भाले, गदा, त्रिशूल, भुशुण्डि, गदा, तलवारें और कुल्हाड़ियाँ निकलने लगीं।
 
He used the sharp enemy-killing arrow called Asura. Thereafter, shining spears, maces, tridents, Bhushundi, maces, swords and axes started emerging from his bow.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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