श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 90: इन्द्रजित और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध तथा इन्द्रजित का वध  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  6.90.48 
कुबेरेण स्वयं स्वप्ने यद् दत्तममितात्मना।
दुर्जयं दुर्विषह्यं च सेन्द्रैरपि सुरासुरै:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
महात्मा कुबेर ने स्वयं स्वप्न में आकर उसे उस बाण की विद्या सिखाई थी। वह बाण इंद्र आदि देवताओं तथा दैत्यों के लिए भी असह्य तथा कठिन था। 48.
 
Mahatma Kubera himself had taught him the art of that arrow by appearing in his dream. That arrow was unbearable and difficult to defeat even for the gods like Indra and the demons. 48.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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