श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 90: इन्द्रजित और लक्ष्मण का भयंकर युद्ध तथा इन्द्रजित का वध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.90.47 
तं समीक्ष्य महातेजा महेषुं तेन संहितम्।
लक्ष्मणोऽप्याददे बाणमन्यद् भीमपराक्रम:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रजित् द्वारा धनुष पर चढ़ाए गए उस महान बाण को देखकर भयंकर पराक्रमी महारथी लक्ष्मण ने भी दूसरा बाण उठा लिया ॥47॥
 
Seeing that great arrow placed on the bow by Indrajit, Lakshmana, the great warrior of terrible valor, also picked up another arrow. 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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